“है अगर जन्नत मोहब्बत तो जहन्नुम का नझारा भी है मोहब्बत ,
है अगर हसी तो कहीं आन्सु भी है मोहब्बत,

कहीं मुशश्किलों से बाहर आने का रास्ता तो कही खुद मुश्कील है मोहब्बत
कहीं जिने क़ी तमन्ना तो कहि मरने कि वजह भी है मोह्ब्बत ,

मोहब्बत हे यारों मोहब्बत …

खुदा का करिश्मा है तो क्या हुआ खुद खुदा के लिये भी राझ है ये मोहब्बत ..”

— अभिजीत

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