होता अगर शंहेंशाह मोहब्बत का , तो हर जगह पे मोहब्बत की बस्ती होती ;

 

हर घर मे इश्क , हर मोहल्ले में इश्कियां होत्ती;हर दिन दीवाना ,हर शाम मस्तानी होती;

 

न कोइ दिल खमोश न कोइ दर्द क़ी हस्ती होती ,गुरुर होता हर किसीको अपनी मोहब्बत पे ;अगर हर जगह पे मोहब्बत की बस्ती होती,

 

ना कोइ जाम होता ना कोइ नशा होता बस सिर्फ मोहब्बत होती,होता अगर शंहेंशाह मोहब्बत का , तो हर जगह पे मोहब्बत की बस्ती होती.

 

– अभिजीत

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