दर्दे तनहाइ का वक्त बहुत कम होता है ,दर्दे तनहाइ मे जिना सिख लो ,

चार आसुं रोना है तो रो लो , पर उन नम आंखो से हसना सिख लो ,

हर पल हसी चाहिये लबो पे , तो पेहले खुद पे हसना सिख लो,

प्यार हर इन्सान की झरुरत हे …इसिलिए गुजारीस हे मेरी..

लोगो से प्यार कि आस न रखखे , प्यार को बाटना सिख लो ..

– अभिजीत

Advertisements