“राम भी है मुजमे रावण भी,
प्यार भी करता हु नफरत भी,

एहसान भी चुकाता हु बदला भी,
वोह केह्ते है ना जैसे लोग वैसा तरीका ….
मजे भी उडाता हु और होश भी…..!!”

– अभिजीत

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