क्या करुं बना हु मै उस मिट्टि से…
जन्हा दिखता है सिर्फ प्यार मेरा,…. बिकता भी है सिर्फ प्यार मेरा. .

कोइ मतलब नहीं तराझु का …क्युकि दोनो पलडे मे है प्यार मेरा..
ना सिखी है नफरत , ना करता हु गिला …
ढाइ अक्षर का जो हे प्यार मेरा, उसिके चारो तरफ हे बाझार मेरा…

-अभिजीत

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