इतना काबु मे रख गुस्से को अपने
“अभिजीत ”
कि गुस्सा तडप तडप क बोले माफ कर दे मेरे आका ,
तेरी मरझी के बगैर नही निकलुंगा तुजसे मै ….!

– अभिजीत

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