Category: Hindi Shayries


प्यार मेरा

क्या करुं बना हु मै उस मिट्टि से…
जन्हा दिखता है सिर्फ प्यार मेरा,…. बिकता भी है सिर्फ प्यार मेरा. .

कोइ मतलब नहीं तराझु का …क्युकि दोनो पलडे मे है प्यार मेरा..
ना सिखी है नफरत , ना करता हु गिला …
ढाइ अक्षर का जो हे प्यार मेरा, उसिके चारो तरफ हे बाझार मेरा…

-अभिजीत

हसी

मेरी हसी ही मेरी खुशी है , मेरी हसी ही मेरा गम
मेरी हसी ही तो है दर्द मेरा ,मेरी हसी ही तो है मरहम …

समजने वाली बात ये है की ..
मेरी हसी मेरी पेहचान है और मेरी हसी ही मेरा राज

– अभिजीत

“राम भी है मुजमे रावण भी,
प्यार भी करता हु नफरत भी,

एहसान भी चुकाता हु बदला भी,
वोह केह्ते है ना जैसे लोग वैसा तरीका ….
मजे भी उडाता हु और होश भी…..!!”

– अभिजीत

बरबादीओ का इतना जशन मनाया हमने कि ,
बरबादी भी हमारी शख्शियत को देख के बरबाद हो गई…!!!

– अभिजीत

इन्सान है रंग तो बदलेगा ही…

क़भी कोइ खुदगर्झ होके रंग बदलता है,
तो कोइ मजबुर होके रंग बदलता है,

कोइ प्यार कर के रंग बदलता है ,
तो कोइ नफरत करके….

इन्सान है रंग तो बदलेगा ही…

– अभिजीत

बे-लिबास हसरतो का क्या करे,
दिल मे झाकने वाले को अपना मान लेती है….!!!!

– अभिजीत

वजह नहि हे तुजसे प्यार करने के लिये,

वजह तो हे सिर्फ तेरे दिदार के लिये ;

जिते-जी ना मिलि तो गम नहि होगा ,

पर मर के खुलि रखुन्गा आंखे तेरे दिदार के लिये.

– अभिजीत

” सिख लो”

दर्दे तनहाइ का वक्त बहुत कम होता है ,दर्दे तनहाइ मे जिना सिख लो ,

चार आसुं रोना है तो रो लो , पर उन नम आंखो से हसना सिख लो ,

हर पल हसी चाहिये लबो पे , तो पेहले खुद पे हसना सिख लो,

प्यार हर इन्सान की झरुरत हे …इसिलिए गुजारीस हे मेरी..

लोगो से प्यार कि आस न रखखे , प्यार को बाटना सिख लो ..

– अभिजीत

होता अगर शंहेंशाह मोहब्बत का , तो हर जगह पे मोहब्बत की बस्ती होती ;

 

हर घर मे इश्क , हर मोहल्ले में इश्कियां होत्ती;हर दिन दीवाना ,हर शाम मस्तानी होती;

 

न कोइ दिल खमोश न कोइ दर्द क़ी हस्ती होती ,गुरुर होता हर किसीको अपनी मोहब्बत पे ;अगर हर जगह पे मोहब्बत की बस्ती होती,

 

ना कोइ जाम होता ना कोइ नशा होता बस सिर्फ मोहब्बत होती,होता अगर शंहेंशाह मोहब्बत का , तो हर जगह पे मोहब्बत की बस्ती होती.

 

– अभिजीत

“है अगर जन्नत मोहब्बत तो जहन्नुम का नझारा भी है मोहब्बत ,
है अगर हसी तो कहीं आन्सु भी है मोहब्बत,

कहीं मुशश्किलों से बाहर आने का रास्ता तो कही खुद मुश्कील है मोहब्बत
कहीं जिने क़ी तमन्ना तो कहि मरने कि वजह भी है मोह्ब्बत ,

मोहब्बत हे यारों मोहब्बत …

खुदा का करिश्मा है तो क्या हुआ खुद खुदा के लिये भी राझ है ये मोहब्बत ..”

— अभिजीत

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